Kya ek Hi din per do bar rakam ko badla Ja sakta hai?
आपका प्रश्न स्पष्ट नहीं है किस विषय में आप पूछ रहे हैं एक दिन में दो बार रकम बदलने का अपने प्रश्न पूछा है तो इसके पूरे संदर्भ का विवरण दीजिए
आपका प्रश्न स्पष्ट नहीं है किस विषय में आप पूछ रहे हैं एक दिन में दो बार रकम बदलने का अपने प्रश्न पूछा है तो इसके पूरे संदर्भ का विवरण दीजिए
ज्वेलरी जॉब वर्क – कानूनी विवरण1) कारीगर को GST होना अनिवार्य नहीं है - यदि कारीगर केवल जॉब वर्क (मजदूरी) करता है
2) कारीगर को सोना देना "Job Work" माना जाता है
- Ownership आपकी रहती है
- कारीगर सिर्फ सेवा (labour) देता है
- अगर कारीगर unregistered है → कोई GST लागू नहीं
- यह पूरी तरह वैध और कानूनी है
3) स्टॉक में 100 ग्राम फाइन का हिसाब
- आप अपने स्टॉक रजिस्टर में यह लिखते हैं:
• Opening stock
• 60 gm कारीगर को issue
• Finished jewellery received
• Wastage दिखाना
• Closing stock निकालना
4) कारीगर की कच्चा हिसाब वाली पर्ची रखना Valid है
- कारीगर slip + दुकान का स्टॉक रजिस्टर
= यह दोनों मिलकर पूरी तरह कानूनी लेखा-जोखा होते हैं
- इसमें GST पंजीकरण की कोई अनिवार्यता नहीं
5) HUID/नंबर में कारीगर के GST की आवश्यकता नहीं
- Hallmarking में कारीगर की registration आवश्यकता नहीं
- सामग्री की जिम्मेदारी व्यापारी की होती है
6) ग्राहक को पक्का बिल देना
- सोने का rate
- नेट वजन
- मेकिंग चार्ज
- 3% GST
- HUID नंबर
=> बिलिंग में कारीगर का GST बिल्कुल आवश्यक नहीं
निष्कर्ष:
Unregistered कारीगर को सोना देना, उससे ज्वेलरी बनवाना,
उसकी पर्ची से हिसाब रखना — यह 100% वैध है।
आप आराम से slip + stock register रखकर काम कर सकते हैं।
यहां आपको एक बार ध्यान रखना है आप कारीगर को जो भी माल देते हैं उसे एक आवक जावक फॉर्मेट के आधार पर ही प्रेषित करेंगे मतलब जो माल आप बनने दे रहे हैं वह वाउचर के माध्यम से ही देना होगा और वाउचर के माध्यम से ही वापस लेना होगा उसका फॉर्मेट देखने के लिए आपको वेबसाइट की गैलरी में जाकर के फॉर्मेट चेक कर सकते हैं
नीचे आपको स्टॉक का फॉर्मेट दिया गया है
स्टॉक रजिस्टर
OPENING STOCK (Date: __/__/____)
Gold Fine : ______ gm
22k Gold : ______ gm
18k Gold : ______ gm
| दिनांक |
विवरण |
इनवर्ड (gm) |
आउटवर्ड (gm) |
नेट स्टॉक (gm) | टिप्पणी |
--------------------------------------------------
|1 कारीगर को जारी ------------------gm
|2 कारीगर से प्राप्त -------------------gm
|3 बिक्री------------------ gm
|4 खरीद (RTGS आदि)-------------gm
------------------------------------------------------CLOSING STOCK (Daily): __________ gm
-------------------------------------------------------नोट: यह स्टॉक बुक किसी भी ऑडिट, बिस हॉलमार्किंग, जीएसटी, पुलिस वेरिफिकेशन में पूर्णतः मान्य होती है।
ग्राहक में यदि पुराना सोना फाइन करके आपको दिया है तो आपको जिस कैरेट का उसे आभूषण बनाना है उसके जमा सोना को आप उसे कैरेट में कन्वर्ट करेंगे और जो वजन आएगा उसकी पर्ची बनाकर देंगे आप उसे जब नया जेवर देंगे बनाकर के देंगे या वह तत्काल खरीद रहा है दोनों कंडीशन में उसके शुद्ध सोने को कैरेट में कन्वर्ट करना होगा और जो आपका नया सामान आप बना कर दे रहे हैं उसमें से उसे माइनस करना होगा और यदि वजन बढ़ता है तो 3% जीएसटी के साथ आप उसे भुगतान प्राप्त करेंगे बिल का फॉर्मेट आपको गैलरी में देखने को मिलेगा
कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने के लिए आप ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन मध्य प्रदेश के पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं और परिचय के साथ-साथ व्यापारियों के लिए कोई जागरूकता कार्यक्रम भी कर सकते हैं संस्था इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है निवेदन है संस्थागत विषय आप संस्था के पदाधिकारी से व्हाट्सएप के माध्यम से चर्चा कर सकते हैं यह मंच सिर्फ व्यापार से संबंधित विषय हेतु है
आपको नियम अनुसार ही चार्ज लेना हो
रू. 25/- प्रति वस्तु» प्रति खेप के लिए न्यूनतम शुल्क रू. 150/- (सेवा कर और अन्य लामू होने वाले शुल्क अतिरिक्त होंगे
होने पर प्रति वस्तु ₹35 प्रति खेत ₹200 सेवा कर और अन्य लागू होने वाले शुल्क अतिरिक्त होंगे
हॉलमार्क सेंटर आपसे जो भी चार्ज ले रहा है वही चार्ज आप अपने ग्राहक से लेंगे
B2B मेटल के बदले ज्वेलरी – GST शॉर्ट नोट
स्थिति:एक व्यापारी मेटल देता है और बदले में दूसरा व्यापारी उससे ज्वेलरी लेता है (B2B लेनदेन)।
कर (GST) के दृष्टिकोण से मुख्य बिंदु
1. यह लेनदेन “बार्टर/एक्सचेंज सप्लाई” माना जाएगा, क्योंकि पैसा नहीं बल्कि सामान के बदले सामान दिया जा रहा है।
2. दोनों पक्ष को अपनी–अपनी तरफ से सप्लाई मानी जाएगी:
आप (मेटल देने वाले):मेटल का ओपन मार्केट रेट (बाजार मूल्य) निकालकर उसी पर टैक्स इनवॉइस (बिल) बनाएंगे।
सामने वाला (ज्वेलरी देने वाला):
ज्वेलरी का बाजार मूल्य तय करके उसी रक़म पर GST वाला इनवॉइस जारी करेगा।
3. दोनों को अपने-अपने इनवॉइस पर GST चार्ज करना होगा और GST रिटर्न (GSTR-1 / 3B) में दिखाना होगा।
4. Input Tax Credit (ITC) लिया जा सकता है –आप ज्वेलरी वाले बिल की GST को ITC में ले सकते हैं।सामने वाला आपके मेटल वाले बिल की GST को ITC के रूप में क्लेम कर सकता है।
5. किसी भी पक्ष को सीधा “GST Adjust” नहीं माना जाएगा, बल्कि दोनों को अपने सप्लाई वैल्यू पर टैक्स लगाकर, बाद में ITC के ज़रिए हिसाब समायोजित करना होगा।
निष्कर्ष (एक लाइन में):मेटल के बदले ज्वेलरी देना भी सप्लाई है; दोनों को अपना-अपना बिल बाजार मूल्य पर बनाकर GST लगाना होगा और बाद में ITC के माध्यम से टैक्स क्रेडिट लिया जा सकता है।
✅ ₹2,00,000 या अधिक की ज्वेलरी खरीद पर PAN अनिवार्य
✅ PAN न हो तो Form 60
✅ बैंकिंग चैनल से भुगतान हो या नकद – PAN की शर्त लागू रहेगी
✅ आधार कार्ड वैकल्पिक है, केवल KYC डॉक्यूमेंटेशन के लिए रखा जाता है
✅ PMLA लागू नहीं (जब तक कि नकद लेन-देन ₹10 लाख से ऊपर न हो)
चाहे नगद हो या ऑनलाइन भुगतान हो या बैंक द्वारा भुगतान हो दोनों ही स्थिति में आपको पैन कार्ड लेना है यदि उसके पास पैन कार्ड नहीं है तो फॉर्म नंबर 60 भरवाना होगा।
यदि ग्राहक सोना देकर जाता है और कोई आभूषण बनाने के लिए देता है तो जो भी वजन उसके आभूषण का आता है उसमें से उसका जमा वजन कम करके जो वजन बढ़ रहा है उसे पर तीन पर्सेंट जीएसटी की दर से बड़े हुए सोने की राशि पर लिया जाएगा और जो उसकी मजदूरी है उसे पर 18% जीएसटी की दर से शुल्क लिया जाएगा ।यह एक बार जरूर ध्यान रखिएगा ग्राहक का सोना जमा वाउचर के माध्यम से जमा किया जाएगा और बिल के माध्यम से दिया जाएगा यही सोना कारीगर को वाउचर के माध्यम से जमा किया जाएगा और वाउचर के माध्यम से ही लिया जाएगा यहां पर दो बातें हैं यदि आप अनिवार्य क्षेत्र में है तो आपको हॉल मार्किंग की डिमांड पर हॉल मार्किंग लगाकर देना होगा और आप नॉन मैंडेटरी जिला में है तो जैसी कंडीशन ग्राहक आप से रखें उसके अनुसार आप कार्य कर सकते हैं
पुरानी ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग आप अपने द्वारा नहीं लगवा सकते हैं यहां यह देखना होगा कि वह पुरानी ज्वेलरी भारतीय मानक ब्यूरो के मापदंड के अनुरूप बनाई गई थी या नहीं यहां आप उसे कह सकते हैं कि आप स्वयं जाकर के इसको जांच कर सकते हैं आपके द्वारा यह कार्य नहीं किया जा सकता क्योंकि हॉल मार्किंग के लिए पूरी प्रक्रिया का आपको पालन करना होगा जो की आभूषण बनते समय ही किया जाता है उसे प्रक्रिया को करते हैं तो आप हॉल मार्किंग लगा कर दे सकते हैं परंतु आपको यहां पर एक बात ध्यान रखना होगी कि आपके द्वार यह कार्य किया जाता है तो आपका रजिस्टर्ड होना जरूरी है मतलब आपके पास हॉल मार्किंग का लाइसेंस होना जरूरी है यदि आपके पास लाइसेंस नहीं है तो आप कस्टमर को सीधे हॉल मार्किंग सेंटर पर भेज कर स्वतंत्र रूप से ग्राहक के द्वारा स्वयं हॉल मार्किंग लगवाई जा सकती है
जॉब वर्क पर 5% जीएसटी है
अभी फिलहाल नए जिलों में हॉलमार्क सेंटर डालने के लिए सब्सिडी का प्रावधान पूर्व में समाप्त किया जा चुका है वर्तमान में अभी कोई नया अपडेट नहीं है जैसा भी सूचना होगी आपको सूचना अपलोड कर दी जाएगी
पिछली बैठक के दौरान इस संबंध में प्रतिवेदन ज्वेलर्स डेवलपमेंट वेलफेयर एसोसिएशन मध्य प्रदेश की ओर से दिया जा चुका है फिलहाल अभी कोई इस संबंध में सरकार की ओर से दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए किसी भी प्रकार की सूचना आने पर या BIS केयर ऐप में वजन का प्रोविजन लागू किया जाएगा तो आपको तुरंत सूचना प्रेषित की जाएगी फिलहाल यदि आपने बीस केयर अप प्ले स्टोर में जाकर एक बार चेक कर लें और उसे अपडेट कर ले
नॉन मैंडेटरी जिले में आप दोनों तरह का आभूषण विक्रय कर सकते हैं रहा सवाल 24 कैरेट का यदि आप रजिस्टर्ड व्यापारी हैं तो 24ck भी बेच सकते हैं अन्य व्यापारियों की तरह प्रोफेशनल टैक्स यदि आपकी टर्नओवर 20 लख रुपए से ऊपर है तो आपको ₹2500 प्रोफेशनल टैक्स 30 जून से पहले जमा करना होता है प्रोफेशनल टैक्स का निर्धारण राज्य के अनुसार अलग-अलग स्लैब में आता है आपका जिला नॉन मैंडेटरी है रजिस्टर्ड व्यापारी दोनों तरह के आभूषण विक्रय कर सकता है हाल मार्किंग के भी और बगैर हाल मार्किंग के भी रहा सवाल HUID का तो आप हाल मार्किंग कर सकते हैं रहा सवाल आपके क्षेत्र में बेची जा रहे आभूषण की शुद्धता का तो यह मामला आप आपके संगठन के माध्यम से हल कर सकते हैं और जो व्यक्ति शुद्धता का दावा करके कम प्रतिशत के आभूषण विक्रय कर रहा है और बिल में शुद्धता का गारंटी और बेचे गए आभूषण की गारंटी में अंतर है तो आप शिकायत कर सकते हैं
जी हां कोई भी एक आइडेंटिटी आपको लेना होगी
कृपया गैलरी का निरीक्षण करें उसमें यूआरडी परचेज का फॉर्मेट दिया गया है
नॉन मैंडेटरी जिला में आप दोनों तरह के आभूषण बेच सकते हैं परंतु हाल मार्किंग लगे हुए आभूषण बेचने के लिए नॉन मैंडेटरी जिला में आपको भारतीय मानक ब्यूरो में अपने दुकान को रजिस्टर्ड करना होगा तभी आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में हॉल मार्किंग लगे हुए आभूषण बेच सकते हैं यहां एक बात जानने योग्य है चाहे अनिवार्य क्षेत्र हो या गैर अनिवार्य क्षेत्र दोनों तरह के क्षेत्र में हाल मार्किंग लगे हुए आभूषण बेचने के लिए भारतीय मानक ब्यूरो में आपका रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है यहां छूट सिर्फ इस बात की है की गैर अनिवार्य क्षेत्र में रजिस्टर्ड ज्वेलर्स दोनों तरह के आभूषण बेचने के लिए स्वतंत्र होगा
यदि आप पुरानी ज्वेलरी की वैल्यू निकाल लेंगे तो आपको 20 ग्राम की जो वैल्यू होगी उसे पर जीएसटी होगी यदि आप टाके वाली ज्वेलरी का नई 20 ग्राम की ज्वेलरी से वजन के आधार पर अदला-बदली करते हैं तो जो वजन आपने नई ज्वेलरी में बढ़ाया है इस वजन के ऊपर जीएसटी देना होगी स्पष्ट है कीमत के आधार पर यदि आप पुरानी ज्वेलरी खरीदेंगे तो 20 ग्राम की कीमत पर जीएसटी लगेगी यदि आप उसके पुराने सोने को कस्टमर की डिमांड के अनुसार जिस कैरेट का वह माल बनाना चाहता है उसे कैरेट पर यदि जमा करेंगे तो शेष बढ़ाने वाले वजन पर जीएसटी और पूर्ण वजन पर लेबर चार्ज लगेगा
यदि कोई व्यक्ति आपके पास 99.50 लेकर आता है तो आप सर्वप्रथम जिस कैरेट में वह माल बनाना चाहता है उसे कैरेट के हिसाब से गोल्ड बार को एक वाउचर में जमा करेंगे वाउचर का फॉर्मेट गैलरी में दिया गया है उसके पश्चात जिस शुद्धता का आप गोल्ड बार निर्मित करेंगे उसे एक वाउचर के माध्यम से कारीगर को भेजेंगे कारीगर माल बनाकर आपको अपने वाउचर से वही आभूषण उतना ही वजन वापस देगा आप ग्राहक को लेबर का बिल देंगे और उसे पर पांच पर्सेंट जीएसटी लेंगे प्रक्रिया के लिए गैलरी में जाकर सारे फॉर्मेट आप देख सकते हैं
यदि कोई ग्राहक बेचने के लिए आपके पास ज्वेलरी लाता है तो आप उसे खरीदी वाउचर के माध्यम से खरीदी करेंगे उसे पर जीएसटी नहीं लगेगा हां यदि खरीदी गई ज्वेलरी आप स्टॉक में से पुनः बेचना चाहते हैं उसकी कंडीशन अच्छी है तो बेचते समय आपको ग्राहक से जीएसटी लेना होगा खरीदते समय नहीं
कृपया एप्लीकेशन की गैलरी में जाएं आपको बिल का सही फॉर्मेट देखने को मिलेगा
वैसे यह नियम की विसंगति है जिम्मेदार तो हॉलमार्क सेंटर होना चाहिए परंतु कानून ने सभी को जिम्मेदार माना है यदि आपने ज्वेलरी बनाई है तो आप जिम्मेदार होंगे यदि आपने कहीं से खरीदा है तो फर्स्ट सेल प्वाइंट के आधार पर बनाने वाला जिम्मेदार होगा और हॉलमार्क सेंटर भी जिम्मेदार होगा क्योंकि यहां पर दोनों की जिम्मेदारी तय होती है प्रश्न यह उठता है कि क्लासिफाइड ज्वेलरी में यदि कोई जूलरी जिसका परसेंटेज भारतीय मानक ब्यूरो के कानून के अनुसार सही नहीं बैठता है तो आपको भी जिम्मेदार माना जाएगा ऐसी स्थिति में हॉलमार्क सेंटर पर भी कड़ी कार्रवाई की जाती है इसलिए यह ध्यान रखें और हॉलमार्क सेंटर को तस्दीक कर दें कि यदि कोई आभूषण का परसेंटेज भारतीय मानव ब्यूरो के कानून के अनुसार नहीं बैठ रहा है तो कृपया उस पर एच यू आई डी ना लगाई जाए ऐसी स्थिति में जांच अधिकारी यह देखता है की आभूषण का निर्माता कौन है मतलब फर्स्ट सेल पॉइंट कौन है उसे ही जिम्मेदार माना जाता है इसलिए यदि आप किसी अन्य दुकानदार से ज्वेलरी खरीद रहे हैं तो केयर ऐप पर उसकी जांच अवश्य करें यदि आप स्वयं बना रहे हैं तो जिस कैटेगरी में आप सोना गलाने के लिए मेल्ट कर रहे हैं उसका अनुपात सही रखें ताकि हाल मार्क सेंटर जाने के बाद भारतीय मानक ब्यूरो के मापदंड से उसकी शुद्धता अधिक ही बैठे
जी नहीं आपको प्रोफेशनल टैक्स नहीं देना है जिन व्यापारियों का टर्नओवर 20 लाख से ऊपर है उन सभी के लिए 2500 रुपया अनिवार्य कर दिया गया है यह फाइनेंशियल ईयर के प्रारंभ से लेकर जून तक भरना होता है और यह सभी के लिए अनिवार्य है जिनका टन और 20 लाख से ऊपर है
2 ग्राम के अंदर तक का अल्टरेशन करवाने पर नई एट यूआईडी आपको नहीं लगाना होगी वही हाल मार्केट और एच यू आई डी रहेगी उस जेवर में आपने क्या परिवर्तन किया है वह आप बिल में मेंशन कर सकते हैं
यदि कोई ₹100000 की ज्वेलरी परचेज करता है और यदि ₹20000 किस्त में वह देता है तो आप बिल्कुल ले सकते हैं इसमें आपकी तरफ से कोई भी आपको जस्टिफिकेशन नहीं देना है आप केस पेमेंट ले सकते हैं लेकिन आप 20,000 से ज्यादा कैश पेमेंट नहीं कर सकते
आपको सिर्फ मेकिंग चार्ज के ऊपर पांच परसेंट जीएसटी लगाना है पूरे 19 ग्राम की कास्ट के ऊपर आपको जीएसटी नहीं लगाना है क्योंकि 19 ग्राम सोना तो उसका स्वयं का था उसने आपको बनाने के लिए दिया है और आपने बनाने के बदले में उससे मेकिंग चार्ज लिया है मेकिंग चार्ज का आप 5 परसेंट जीएसटी एप्लीकेबल करके बिल दे सकते हैं
यदि आप अलग से मेकिंग चार्ज वाउचर में मेंशन करेंगे तो 5 परसेंट जीएसटी एप्लीकेबल होगी आप प्राइस के साथ मेकिंग चार्ज इंक्लूड करके लिखेंगे तो आप तीन पर्सेंट जीएसटी एप्लीकेबल कर सकते हैं
जो भी शुद्धता का दावा कर रहे हैं वह बकायदा आप जीएसटी बिल में मेंशन करके विक्रय कर सकते हैं
यदि आप कंपोजिशन में रजिस्टर्ड है तो आपको बिल में जीएसटी नहीं लिख सकते आपको लागत मूल्य के साथ ही जीएसटी लेना होगा और यदि आप कंपलसरी जीएसटी के अंतर्गत है तो आपको बिल में अलग से जीएसटी मेंशन करना होगी यहां पर दो अलग-अलग कैटेगरी है कंपोजीशन में जीएसटी रजिस्ट्रेशन और कंपलसरी में जीएसटी रजिस्ट्रेशन दोनों के अलग-अलग नियम है कंपोजीशन में आप जीएसटी देकर आएंगे सामने वाला व्यापारी आपसे जीएसटी लेगा लेकिन आप जीएसटी बिल में कस्टमर से नहीं ले सकते आपको लागत मूल्य में जीएसटी जोड़ना होगा अपना मुनाफा जोड़ना होगा और उसका बिल बनाना होगा लेकिन कंपलसरी में आपको हर चीज अलग-अलग लिखना है
पुराना सोना आप विधिवत विधि सम्मत तरीके से खरीदें उसकी प्रक्रिया करवाएं और यहां दो तरह की व्यवस्था है या तो पुराने सोने को गला करके कारीगर के माध्यम से बनवा कर उसे अपने रजिस्ट्रेशन से एच यू आई डी करवाई जा सकती है या फिर कोई अच्छी कंडीशन का पुराना आभूषण यदि आपके पास विक्रय के लिए आता है वर्तमान मापदंड के आधार पर यदि बना होगा तो आप उसे सीधे एच यूआईडी करवा सकते हैं पुराने आभूषण को गला करके नए बनाने के लिए वाउचर का कैसे आदान प्रदान किया जाएगा गैलरी में जाएंगे तो आपको वहां पर उनकी स्लिप का प्रोफार्मा देखने को मिल जाएगा
यह खबर पूरी तरह गलत है अभी जैसा चल रहा है वैसा ही चलता रहेगा अनिवार्य क्षेत्र में अनिवार्यता है गैर अनिवार्य क्षेत्र में बगैर रजिस्ट्रेशन के हॉल मार्किंग वाले आभूषण नहीं बेचे जा सकते जो व्यवस्था जैसी है वैसी ही चल रही है अभी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है
B2b और b2c दोनों में आपको पूरा लिखना होगा 22 कैरेट 916 जो भी कैरेट है कैरेट के साथ उसका परसेंटेज आपको बिल में मेंशन करना चाहिए
इस तरह के बिल अमूमन वह होलसेलर और मैनु फैक्चर है बनाते हैं जिन्हें अपनी स्वयं की एच यू आई डी नहीं लगानी है दूसरी बात यह है की अनफिनिश्ड आर्टिकल या आभूषण यदि आप बुलाते हैं तो इसे फिनिश करवा कर एच यू आई डी लगाने की जिम्मेदारी आपकी होगी और आभूषण के संबंध में जो शुद्धता है उसके लिए भी आप ही जिम्मेदार होंगे इस तरह के बिल बना कर देना सही है लेकिन हमारे जैसे रिटेलर के लिए जो खुद का काम करते हैं उन्हें इनसे बचना चाहिए
आपने यह एप्लीकेशन डाउनलोड कर ली है मतलब आप हमसे जुड़ चुके हैं और अपने सभी इष्ट मित्रों को इसके लिंक भेज कर उन्हें भी जोड़ें ताकि व्यापार की सही जानकारी बदलते परिवेश में बदलने वाली कानूनों की सही जानकारी और व्यापार करने हेतु कौन-कौन सी जानकारियों की आवश्यकता होती है इन सभी की सूचना इस एप्लीकेशन के माध्यम से आपको प्राप्त होती रहेगी
जब आप गोल्ड को ऑनलाइन खरीदते हैं और गोल्ड ऑनलाइन ही आपके अकाउंट में स्टोर रहता है तो वह डिजिटल गोल्ड कहलाता है, यानि डिजिटल गोल्ड ऑनलाइन ही खरीदा और स्टोर करके रखा जाता है, और यह डिजिटल रुप में ही होता है। डिजिटल गोल्ड फिजिकल रुप में नहीं होता है और डिजिटल गोल्ड को इंटरनेशनल गोल्ड प्राइज पर खरीदा और बेचा जा सकता है। डिजिटल गोल्ड खरीदने के लिए किसी ऑफलाइन स्टोर में जानें कि जरूरत नहीं पड़ती, डिजिटल गोल्ड को Paytm, Google Pay या PhonePe के माध्यम से ही आसानी से खरीदा जा सकता है। इसके अलावा अगर आप Paytm, Google Pay या PhonePe से खरीदे गए डिजिटल गोल्ड का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आप कुछ एक्स्ट्रा चार्ज देकर इसे असली सोने में भी बदलवा सकते हैं।
नियमानुसार 2 ग्राम तक का अल्टरेशन करवाने पर आपको किसी भी प्रकार के एच यू आई डी में परिवर्तन नहीं करना होगा मतलब नई एच यू आई डी नहीं लगवाना होगी परंतु यदि जोड़ है तो 3 ग्राम 990 मिलीग्राम तक छूट के अंतर्गत आता है यदि आपने लगवा लिया है तो बेहतर है परंतु नियमानुसार 1 ग्राम 990 सिंगल पीस 3 ग्राम 990 पेयर एग्जामडेट है
2 ग्राम तक की ज्वेलरी छूट के अंतर्गत आती है यदि उस पर पुरानी या नकली हाल मार्किंग लगी है तो उसे आप को मिटाना पड़ेगा उस पर एच यू आई डी लगाने की आवश्यकता नहीं है
वैसे तो माल बेचने पर आपके द्वारा बनाए गए बिल पर एच यू आई डी नंबर डालना अनिवार्य नहीं है परंतु यदि आप एच यू आई डी नंबर डालते हैं तो यह आपके लिए सुरक्षित रहेगा पर अनिवार्यता नहीं है
आदरणीय पिछले प्रश्न में आपने यह स्पष्ट कहां किया था कि आप एक रजिस्टर्ड ज्वेलर्स से माल खरीद रहे हैं यदि आप रजिस्टर्ड ज्वेलर्स से माल खरीद रहे हैं तो आपको फिर से एच यू आई डी नहीं लगाना है कई बार हम माल खरीदते जरूर हैं लेकिन हम स्वयं की एच यू आई डी लग जाते हैं इसलिए मैंने यह बात लिखी थी आप यदि अपने प्रश्न में स्पष्ट करते कि मैं एक रजिस्टर्ड ज्वेलर्स से माल खरीद रहा हूं तो मैं आपको यही कहता कि आप स्वयं की एच यू आईडी नहीं लगाएं आप मेरे उत्तर को पढ़े मैंने उसमें स्पष्ट रूप से कहा है
जब तक आपके खाते में ग्राहक के द्वारा भेजे गए पैसे नहीं आते हैं या आपको बैंक की ओर से जो मैसेज आना है कि आपके अकाउंट में ₹20000 आ चुका है जब तक आप ग्राहक को सामान नहीं देंगे ग्राहक के अकाउंट से पैसे कट गए हैं इसका आशय यह नहीं है कि वह आपके अकाउंट में आए इसलिए यदि ग्राहक आपको फोन कर रहा है तो आप इससे कहे कि आपने जो पैसे भेजे हैं वह हमारे खाते में अभी नहीं आए हैं आप पता करें कि आपका पैसा हमारे अकाउंट में क्यों नहीं आया है अतः जब तक आपके अकाउंट में पेमेंट नहीं आ जाता तब तक आप सामान की डिलीवरी नहीं देंगे यह समस्या आपकी नहीं है यह कस्टमर की समस्या है अतः जब तक आपके अकाउंट में पेमेंट नहीं आता तब तक आप सामान की डिलीवरी नहीं देंगे
लॉन्ग दाने 1 ग्राम 990 मिलीग्राम का सिंगल आइटम 3 ग्राम 990 जोड़ी इन सभी पर हाल मार्किंग के द्वारा छूट दी गई है इन्हें हाल मार्किंग नहीं कराना है
नहीं यदि आपने उसे ऑनलाइन पेमेंट दिया है तो उसकी प्रोसीजर भी विधि अनुसार होना चाहिए यदि वह जब नगद जमा कराने का बोलता है तो आप उससे चेक ले सकते हैं सीधे आपके अकाउंट में जमा करना या नगद जमा करना गलत इंट्री होगी वैसे भी बैंक में 50000 से ऊपर कोई व्यक्ति नगद जमा करने आता है तो बैंक से केवाईसी मांगती है ऐसी स्थिति में यदि आपने यूपीआई के माध्यम से या किसी भी विधि सम्मत तरीके से उसे पैसे दिए हैं तो उसे उन्हीं वैधानिक व्यवस्था से वापस लेना होगा अन्यथा नगद जमा करने की स्थिति में उस पैसे के संबंध में स्पष्टीकरण की जिम्मेदारी आपके ऊपर रहेगी
जी नहीं जो आपने आभूषण एच यू आई डी के बेच चुके हैं उनका कोई रिकॉर्ड नहीं रखना है सिर्फ बुक्स में आपके स्टॉक का हिसाब आपको रखना है
आप आधा अधूरा माल कैसे विक्रय करेंगे-? यदि आप अनिवार्य क्षेत्र में हैं तो आप बगैर एच यू आई डी के माल विक्रय नहीं कर सकते रहा सवाल अधूरे माल को विक्रय करने का अर्ध निर्मित माल विक्रय करने का तो यह एक तकनीकी प्रश्न नहीं है कोई आपसे पूछेगा तो आप क्या जवाब देंगे मैंने अधूरा आभूषण बेच दिया इस तरह का कोई भी क्लास मैं छूट नहीं है
किसी भी लीगल चैनल यूपीआई हो बैंक हो या चेक हो इसमें 50,000 से अधिक के भुगतान पर किसी प्रकार का कोई केवाईसी नहीं लेना है
आप नियमानुसार उससे आपके द्वारा आपके लाइसेंस पर की गई हाल मार्किंग की डिटेल प्राप्त कर सकते हैं वैसे तो यह संभव नहीं है पर फिर भी आप अपनी संतुष्टि के लिए हॉलमार्क सेंटर से आपके लाइसेंस पर किए गए हाल मार्किंग की डिटेल मांग सकते हैं क्योंकि यह सारी डिटेल उन्हें बीआईएस के ऑफिशियल पोर्टल पर भी अपलोड करना होती है तो आप इस माध्यम से यह पता कर सकते हैं कि क्या आपके लाइसेंस का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है
कंपोजीशन के व्यापारी के द्वारा जीएसटी दिया जा सकता है परंतु लिया नहीं जा सकता अतः आप जो माल खरीद के लाते हैं वह जीएसटी दे करके लाते हैं आप अपने मूल्य में जीएसटी जोड़ करके दिल बनाएंगे और हाल मार्किंग के चार्जेस अलग से लिखेंगे आप ग्राहक से लिखित में जीएसटी नहीं ले सकते हैं परंतु आप मूल्य में जीएसटी जोड़ करके दिखा सकते हैं उसे अलग से लिखना नहीं है
No आपको केवाईसी लेना होगी
विधिवत रूप से सारे भुगतान प्राप्त हुए हैं जो सरकार द्वारा मान्य हैं इसलिए आपको रजिस्ट्रेशन नहीं कराना होगा जो नगद र में भुगतान करते है या लेते हैं यह रजिस्ट्रेशन उनके लिए अनिवार्य होगा
सरकार की ओर से सब्सिडी बंद कर दी गई है किसी भी जिले में हॉलमार्क सेंटर डालने पर कोई सब्सिडी प्राप्त नहीं होती है
50000 रु से अधिक नगद रकम पर KYC उन ज्वेलर्स को लेने होंगे जो FIU में रजिस्टर होंगे। FIU में वही ज्वेलर्स रजिस्टर होंगे, जिनके कोई भी एक ग्राहक पूरे वित्तिय वर्ष में टुकड़े टुकड़े में 10 लाख से ऊपर के आभूषण/ रत्न नगद में खरीद किया हुआ हो। ऎसे में सिर्फ एक ग्राहक के कारण वह ज्वेलर्स एक रिपोर्टिंग आइडेंटिटी हो जाएंगे और उसे वह सब प्रक्रिया करनी होगी, मसलन रिटर्न, फ़ाइल करना होगा और अब उसे प्रत्येक ग्राहक के 50000 रु से अधिक रकम पर KYC लेनी होगी और उस बिल के साथ सलंग्न कर रखनी होगी। यह PMLA का नियम है। रही बात ग्राहकों के पुराने गहनों की खरीद या उससे बनवायी गई आभूषण के लिए, KYC की बाध्यता नही है। यह आपके सुरक्षा के लिए है कि पुराने आभूषण चोरी के तो नही है। इसलिए केवाईसी ले सकते हैं विधि माननीय भुगतान जैसे डिजिटल पेमेंट चेक और ऑनलाइन पेमेंट इसमें आपको केवाईसी की आवश्यकता नहीं रहेगी यह तो अधिकृत भुगतान के अंतर्गत आएगा
जो भी आभूषण लेकर आप ट्रेवल कर रहे हैं तो आपके पास वह आभूषण का एक वाउचर होना चाहिए जो इस बात को प्रमाणित करेगा कि यह माल आपकी दुकान का है जो आप विक्रय हेतु अन्य शहरों में जा रहे हैं आपके दुकान के लेटर पैड पर उसका वजन का विवरण होना चाहिए साथ ही साथ यदि आप अनिवार्य क्षेत्र से हैं तो आपके पास समस्त आभूषण जो सिंगल पीस में 2 ग्राम से ऊपर है और डबल पीस में 4 ग्राम से ऊपर है सभी को एच यू आईडी किया हुआ होना चाहिए साथ में दुकान का लेटर पैड पर यह प्रमाणित होना चाहिए कि यह स्टॉक आपकी दुकान का है एवं साथ में बिल बुक होना अनिवार्य है वापसी के समय जो लेटर पैड जिस पर आपने वजन किया है जो भी माल आप विक्रय करते हैं उस वजन का बिल बना हुआ होना चाहिए और जिस लेटर पैड पर आप वजन लिख कर ले जा रहे हैं उस पर आपने जो आभूषण विग्रह किए हैं उसकी एंट्री आपको करना होगी साथ ही साथ जो आभूषण आप ले जा रहे हैं हॉल मार्क सेंटर का हाल मार्किंग काबिल होना चाहिए यदि वह आपके स्वयं का बनाया हुआ है तो आपका और यदि आपने किसी अन्य से खरीदा है तो उसका विवरण उसमें होना चाहिए इसके बावजूद भी यदि कहीं आपको कोई रोकता है तो आप अपने क्षेत्र के जीएसटी अधिकारी का नंबर अपने साथ में रखेंगे ताकि समय पड़ने पर उनको फोन करके आप इस बात की तला कर सकें यदि आपको पुलिस रोकती है और आपके सारे प्रमाण देने के बावजूद भी वह आपको नहीं छोड़ते हैं या कोई कार्यवाही करने का दबाव डालते हैं तो आपको जीएसटी अधिकारी से तुरंत संपर्क करना होगा
बगैर परचेज बिल के यदि आप सोना ले रहे हैं तो जस्टिफाई कैसे करेंगे यह तो गलत प्रक्रिया है यदि आप आरटीजीएस से सोना ले रहे हैं तो आप उससे आभूषण बनाकर यदि अनिवार्य क्षेत्र में हैं तो आपके लिए एच यू आई डी करवाना अनिवार्य है यदि आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में हैं तो आप उससे सादा माल भी बना कर रख सकते हैं आरटीजीएस से सोना लेना एक वैधानिक प्रक्रिया है लेकिन बगैर परचेज बिल से यदि आप गोल्ड खरीद रहे हैं तो वह तरीका अवैधानिक है
जी हां आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में हैं और लाइसेंसी भी है आप दोनों तरह का माल भेज सकते हैं मतलब 1 अप्रैल 2023 से लागू हुए नए नियम के आधार पर आपको HUID के साथ-साथ आप अपना लोकल माल भी विक्रय कर सकते हैं आप दोनों तरह का माल बेचने के लिए अधिकृत हैं
आप यदि कारीगर हैं और आपका टर्नओवर यदि 20 लाख से ऊपर है तभी आप जॉब वर्क का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं अन्यथा आप किसी भी प्रकार का श्रम कार्ड या जीएसटी रजिस्ट्रेशन से मुक्त है आप एक हस्त शिल्पी के रूप में अपना कार्य कर सकते हैं
आप का रजिस्ट्रेशन कैंसिल करना होगा बच्चे के नाम से नया रजिस्ट्रेशन लेकर के आपको रजिस्टर्ड करना होगा बीआईएस में साथ ही बेटे का जीएसटी नंबर भी होना चाहिए उसके साथ साथ दुकान का स्थापना प्रमाण पत्र जिसको हम शॉप एक्ट लाइसेंस कहते हैं वह होना चाहिए दुकान का नाम क्या है किसके नाम पर है वह होना चाहिए दुकान का नक्शा साथ में लगेगा और नए लाइसेंस को आपको अप्लाई करना होगा आपका लाइसेंस नहीं चलेगा और ना ही ट्रांसफर होगा
आप अपनी दुकान के विधिवत दस्तावेज साथ में लेकर चलें जीएसटी यदि आप रजिस्टर्ड है तो जीएसटी का सर्टिफिकेट साथ में रखें यदि आप बीआईएस में रजिस्टर्ड है तो बीआईएस का सर्टिफिकेट साथ में रखें अपने दुकान का कार्ड रखें और जो आप 80 किलोमीटर या 100 किलोमीटर आप अपना माल लेकर के जा रहे हैं तो उसकी वैलिडिटी का प्रूफ भी अपने साथ रखें कि अमुक आभूषण या जो मेरे साथ आभूषण जा रहे हैं वह मेरी दुकान का स्टॉक है और मैं इसे विक्रय करने के लिए या हाल मार्किंग करने के लिए इस सेंटर पर ले जा रहा हूं इसके बावजूद भी यदि वह पुलिस या आरटीओ आपको परेशान करता है तो आप अपने जिले के क्षेत्र के जीएसटी अधिकारी का नंबर अपने पास रखें और उसे तुरंत फोन लगाएं कि इस इस तरीके से मुझे यहां पर अनावश्यक रूप से रोका गया है मेरे पास सभी वैलिड दस्तावेज है उसके बावजूद भी मुझे रोका जा रहा है कृपया इस संबंध में मुझे उचित मार्गदर्शन दें आपके पास जो आभूषण है विधि सम्मत दस्तावेज होना चाहिए
आप कारीगर हैं कोई भी दुकानदार यदि आपको सामान बनाने के लिए देता है तो वाउचर के माध्यम से आप सोना जमा करा करें यदि आप का टर्नओवर 40 लाख से कम है और आप अनिवार्य जिले के अंतर्गत आते हैं तो आप के लिए लाइसेंस लेने की अनिवार्यता नहीं है आप यदि स्वयं का माल विक्रय करते हैं तो आप बगैर सील का माल विक्रय कर सकते हैं जो व्यक्ति आपको मेटल देकर जाते हैं उसके बदले आप उनको सामान बना कर देते हैं तो आप अपने पास वेस्टेज के रूप में जो पैसा लेते हैं उसकी रसीद बनाकर उनको जरूर दिया करें और आप खुद भी यदि माल बेचते हैं तो आपके पास विधिवत रूप से अकाउंट होना चाहिए जब तक आप विक्रय कर रहे हैं तो आप 4000000 तक की सीमा के अंतर्गत जीएसटी से भी फ्री हैं और हाल मार्क रजिस्ट्रेशन से 20 हुई है लेकिन दूसरी बार यदि आप दुकानदार का कार्य कर रहे हैं और मेटल ट्रांसफर ले रहे हैं तो 20 लाख तक आपका जॉब वर्क की छूट रहेगी उसके पश्चात आपको जीएसटी में रजिस्ट्रेशन करवाना कंपलसरी रहेगा दोनों काम की स्थिति में आपको अकाउंट मेंटेन करना होंगे गैलरी में जॉब वर्क के लिए वाउचर का प्रोफॉर्मा दिया गया है
₹20000 प्रति वर्ष की है
आप थोक व्यापारी को मेटल ट्रांसफर करेंगे आरटीजीएस के बदले तो यहां पर आपको जॉब वर्क थोक व्यापारी को देना होगा लेकिन मैन्युफैक्चर कराने की स्थिति में यहां पर मेटल ट्रांसफर करने पर आपके रजिस्ट्रेशन पर एच यू आई होगी बेहतर यह रहेगा आरटीजीएस करें और बदले में मेटल देने लेकिन एंट्री आरटीजीएस की होगी
खरीदी का फॉर्मेट शीघ्र ही गैलरी में डाल दिया जाएगा लेकिन आप जो पुराना सोना कस्टमर से खरीदेंगे तो उसे आरटीजीएस के रेट के अनुसार जिस कैरेट का आपने आभूषण भेजा है उसके रेट के अनुपातिक भाव में उसे खरीदना होगा क्योंकि बेचते समय भी आपने आरटीजीएस का रेट लगाया है
बिल का फॉर्मेट गैलरी में दिया गया है आपको तीन परसेंट जीएसटी ही चार्ज करना है यदि 99 900 का ऑनलाइन पेमेंट किया जा रहा है तो केवाईसी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह एक वैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत आपको भुगतान कर रहा है गैस भुगतान के संबंध में केवाईसी आवश्यक रहेगी
जी हां नियम तो पूरे भारत पर लागू हो चुका है परंतु वह जिले जहां पर अभी मैंडेटरी नहीं हुआ है वहां पर दोनों तरह के आभूषण विक्रय की इजाजत है परंतु 1 अप्रैल 2023 से सिक्स डिजिट के एच यू आई डी को पूरे देश में लागू माना जाएगा और इस संबंध में नोटिफिकेशन निकला है जुलाई 2021 से पूर्व जिन्होंने डिक्लेरेशन वजन के आधार पर दिया था उन्हें ही 3 माह की छूट दी गई है बाकी अन्य ज्वेलर्स को नहीं नियम पूरे भारत में लागू है
जी हां आप यू आर डी परचेज से जो सोना खरीदी करते हैं उसे होलसेलर को देख कर के एच यू आई डी के आभूषण खरीदी कर सकते हैं यू आर डी परचेज के लिए एक खरीदी वाउचर आपको बनाना होगा जिसका प्रोफार्मा बाजार में उपलब्ध है शीघ्र ही इसका प्रोफार्मा गैलरी में दिया जाएगा उसमें आप जो ग्राहक आपके पास सामान बेचने आता है उसका नाम पता आइटम का नाम वजन शुद्ध वजन भाव और हस्ताक्षर यह सभी कॉलम उसमें रहेंगे उसके आधार पर आप इसे शुद्ध करा कर मेटल ट्रांसफर के माध्यम से होलसेलर को दे सकते हैं होलसेलर आपको जॉब वर्क का बिल देकर एच यू आई डी हॉलमार्क सेंटर से करा कर आपको हॉलमार्क सेंटर का बिल साथ में देगा यह पूरी प्रक्रिया है
डिक्लेरेशन ऑफ कस्टमर का उपयोग आप हमेशा कर सकते हैं या तो आप इसे अपनी बिल बुक में पीछे प्रिंट करवा ले या फिर स्टैंप सील बनाकर बिल बुक के दोनों पृष्ठ पर कार्बन कॉपी पर भी और मूल कॉपी पर भी इसे अंकित कर सकते हैं और ग्राहक के हस्ताक्षर ले सकते हैं कोई भी हाल मार्किंग का आभूषण बेचते समय डिक्लेरेशन ऑफ कस्टमर का लेना आवश्यक है
जी हां उन्हें भी एच यू आई डी अनिवार्य है छूट नहीं है जी हां यदि आप रजिस्टर्ड ज्वेलर्स हैं अनिवार्य क्षेत्र में हैं या गैर अनिवार्य क्षेत्र तो उन्हें भी एच यू आई डी कराना होगा यदि आपकी 10 चैन में से 5 चैन बच जाती है तो आप यदि उसे मेल्ट करते हैं तो उन चेन क ऊपर जो एच यू आईडी लगी है उसे आप अपने पास दर्ज करेंगे और उसके पश्चात आप अपनी चैन को गला करके नई चैन बना सकते हैं और नए सिरे से एचपीयू आईडी लगा सकते हैं बची हुई चैन का आपको एच यूआईडी मेंशन करना चाहिए कि यह वाले एच यू आई डी का जो मेरा स्टॉक है उसमें से पांच चैन मैंने गला दी है उन्हें नए सिरे से बनाया है तो फिर आपको नए बने हुए सामान पर नई एच यू आईडी प्राप्त हो जाएगी
17 फरवरी 2023 से या लागू हो चुका है आप जो भी कारीगर को सामान आभूषण बनाने के लिए भेजते हैं उसका वाउचर का नियम तो पहले से ही लागू है कारीगर को माल बनाने के लिए देते समय और कारीगर से माल बनाकर वापस लेते समय दोनों समय आपको वाउचर बनाना होगा इसके साथ ही साथ यदि कस्टमर आपके पास कोई स्वयं का सोना जमा कर आभूषण बनाना चाहता है तो उसे भी जमा का वाउचर आपको देना होगा और जब आप अपने ग्राहक को आभूषण बना करके देंगे तो उसे यदि जमा वजन बना कर दिया है तो जॉब वर्क का बिल देना होगा और यदि वजन बढ़ा है तो आपको बढ़े हुए वजन का बिल और जॉब वर्क का बिल दोनों बनाकर देना होगा यदि कस्टमर पुराना सोना बेच देता है तो आपको यु आरडी परचेज करना होगा और जो रकम वह खरीद रहा है उस पूरी रकम की राशि का बिल बनेगा और उस पर जीएसटी लगेगा
वर्तमान में 288 जिले संपूर्ण भारत से मैंडेटरी हो चुके हैं
आप कारीगर हैं यदि आप का टर्नओवर जॉब वर्क का 4000000 रुपए वार्षिक से ऊपर हो चुका है तो आपको जीएसटी में रजिस्ट्रेशन लेना होगा यदि आप कारीगरी के साथ-साथ बेचने का काम करते हैं तो आपको भारतीय मानक ब्यूरो में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा क्योंकि आप मैंडेटरी जिले में हैं दूसरी बात आप यदि विक्रय करते हैं तो आपको जीएसटी का या कंपोजिशन जीएसटी का रजिस्ट्रेशन भी लेना होगा लेकिन यदि आप सिर्फ कारीगरी करते हैं और आप का टर्नओवर जॉब वर्क का 4000000 से कम है तो आपको किसी भी प्रकार का कोई जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं लेना है दूसरा प्रश्न आपका जो आप अपने आसामी को आभूषण बना करके देते हैं उसके बदले में जो आप वेस्टेज लेते हैं वह आपका जॉब वर्क होगा उसे आप बुक्स में सीधे जमा करेंगे इसका कोई फॉर्मेट नहीं होता है आप या तो कैश पेमेंट ले सकते हैं क्या ऑनलाइन पेमेंट ले सकते हैं
बिल का फॉर्मेट गैलरी में दिया गया है जिसमें हर चीज अलग-अलग लिखी हुई है इसमें किसी भी प्रकार का कोई जीएसटी से संबंधित 18% का मामला नहीं आएगा
जी हां अभी आप दोनों तरह का माल बेच सकते हैं परंतु ध्यान रहे 1 अप्रैल के बाद से आपके यहां सिर्फ एच यू आई डी काही संग्रह विक्रय और प्रदर्शन होना चाहिए बगैर हाल मार्किंग का जो आभूषण आदि विक्रय करेंगे तो जो आप अपने आभूषण का दावा कर रहे हैं वह उस दावे के मुताबिक होना चाहिए साथ ही अपनी दुकान के लिए खरीदी करते समय आपको क्लासिफाइड बिल आपके पास होना चाहिए
पहले तो यह बताएं आप कौन से जिले के अंतर्गत आते हैं उसके पश्चात बता पाएंगे कि कैसे आप कोई गांव में जाकर के माल बेचते हैं तो क्या करना होगा रहा सवाल दूसरे प्रश्न का तो आप बगैर जीएसटी बिल के एच यू आई डी का माल नहीं बेच सकते हैं
नहीं टांके वाले में कैरेट मेंशन नहीं करना है लेकिन बिल बनाते समय आप अपने आभूषण का जो दावा कर रहे हैं उस दावे के अनुसार आपका आभूषण होना चाहिए ऐसा ना हो कि आप 75% का माल बना रहे हैं और दावा 85 परसेंट का कर रहे हैं तो यह गलत होगा अतः टांके वाली ज्वेलरी पर कोई सील नहीं लगानी है वैसे भी सनावद अभी नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है
Www.manakऑनलाइन पर जाएं उस पर रजिस्ट्रेशन होगा
मिनिमम 5% से लेकर 8% तक का जॉब वर्क या वेस्टेज होती है और यह आपके और कारीगर के आपसी समझौता सौदा के आधार पर भी निर्धारित होता है इसका कोई भी एक निश्चित प्रतिशत नहीं है आप किस स्थान से हैं अगली बार प्रश्न लिखते समय जरूर अपने शहर का नाम लिखिए गा
यही प्रश्न आपने पूर्व में भी पूछा था ऊपर उत्तर दिया जा चुका है
जो आपका केडियम वाला आभूषण एच यूआईडी हो चुका है उसका विषय नहीं है लेकिन जो आपका टांके वाला आभूषण है उसे आपको प्रोसेस कर के नए सिरे से बनाना होगा क्योंकि आप अनिवार्य क्षेत्र में हैं और अनिवार्य क्षेत्र में 1 अप्रैल से बगैर एच यू आई डी का कोई भी आभूषण विक्रय नहीं किया जाएगा रहा सवाल बिल का तो आपको उसने जो बिल बना कर दिया है वह बिल नहीं चलेगा आप उसे जस्टिफाई नहीं कर पाएंगे तीसरा प्रश्न का उत्तर यह है कि जो आपके पास स्टॉक है यदि आपने स्टाक डिक्लेरेशन दिया होगा तो वह जस्टिफाई हो पाएगा अन्यथा आपका स्टॉप 0 माना जाएगा विस्तार से समझने के लिए एप्लीकेशन के कोने में ऑप्शन दिया गया है व्यक्तिगत रूप से बात कर सकते हैं
जब आप मैन्युफैक्चरिंग का काम करते हैं और उसे अपने एच यू आई डी करा कर के दिया है तो यहां आप पूर्ण रूप से विधि सम्मत कार्य कर रहे हैं आपके विक्रय करने के पश्चात यदि कोई व्यक्ति उसमें किसी भी प्रकार का फ्रॉड करता है या चैन के आंकड़े वगैरा हल्के करने का प्रयास करता है तो जिम्मेदारी उसकी ही रहेगी क्योंकि जब आपने एच यूआईडी करवाया है उसी समय पोर्टल पर उस चैन की शुद्धता दर्ज हो जाती है इसलिए आप जिम्मेदार नहीं रहेंगे वैसे हमने गैलरी में डिक्लेरेशन ऑफ कस्टमर का एक प्रारूप दिया हुआ है माल विक्रय करते समय आप इसका उपयोग कर सकते हैं यह प्रोफार्मा सभी के लिए है रिटेलर अपने कस्टमर से ले सकता है होलसेलर अपने रिटेलर से ले सकता है और मैन्युफैक्चर अपने होलसेलर से ले सकता है यह सभी के डिक्लेरेशन के काम आएगा
जी हां आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में है आपका डर नंबर 40 लाख से ऊपर है यदि आप रजिस्ट्रेशन लेते हैं तो आप दोनों तरह का माल विक्रय कर सकते हैं स्टोरेज एक जगह कर सकते हैं लेकिन डिस्प्ले अलग अलग करना होगा काउंटर के एक भाग में एच यू आई डी हाल मार्किंग का और काउंटर के दूसरे भाग में बगैर एच यू आई डी हाल मार्किंग का आप रख सकते हैं
जी हां आप 2 ग्राम से कम की ज्वेलरी बेच सकते हैं परंतु यह ध्यान रखें आप अपने आभूषण का जो दावा कर रहे हैं वह आपके दावे के मुताबिक होना चाहिए जो भी कैटेगरी मानक ब्यूरो ने तय की है उनके टेकरी के अनुसार ही आपका 2 ग्राम से कम की ज्वेलरी होना चाहिए रहा सवाल डिस्प्ले का तो रजिस्टर्ड ज्वेलर्स को अपनी दुकान पर अपना रजिस्ट्रेशन भारतीय मानक ब्यूरो का चिन्ह और उपभोक्ता के लिए एक हेल्पलाइन नंबर को दुकान पर प्रदर्शित करना होता है यदि जांच के दौरान अधिकारी आपसे किसी आभूषण के संबंध में कोई दस्तावेज की मांग करता है जैसे हॉल मार्क सेंटर का बिल जांच हेतु लिए गए आभूषण का खरीदी बिल टर्नओवर संबंधी कोई जानकारी यही जानकारी मांगी जाती है इसके अलावा नियमानुसार आपकी दुकान में डिस्प्ले पर अनिवार्य शेत्र होने पर हाल मार्क वाली ज्वेलरी का ही प्रदर्शन होना चाहिए साथ ही साथ नियमानुसार अनिवार्य क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति बगैर हाल मार्किंग या 1 अप्रैल से लागू होने वाले नियम के आधार पर बगैर एच यू आई डी का माल प्रदर्शन नहीं करेगा स्टॉक नहीं करेगा विक्रय नहीं करेगा इसके लिए आपको राजपत्र का अध्ययन करना होगा कौन-कौन से गाइडलाइन दी गई है
जी हां आप रजिस्ट्रेशन कैंसिल करा सकते हैं पर ध्यान रखें भविष्य में यह पूरे देश में अनिवार्य होगा बेहतर यह है कि आप रजिस्टर्ड ज्वेलर्स बनकर यदि गैर अनिवार्य जिले में है तो दोनों तरह का माल बेच सकते हैं
जी बिल्कुल अनिवार्य जिले में 2 ग्राम से ऊपर की कोई भी ज्वेलरी बगैर एच यू आई डी के विक्रय नहीं होगी चाहे टर्नओवर 4000000 से कम हो या ज्यादा हो यहां एक बात ध्यान रखना है अनिवार्य जिले में जिन व्यापारियों का टर्नओवर 40 लाख से कम है वह रजिस्ट्रेशन लेने या ना लेने के लिए स्वतंत्र है अनिवार्यता नहीं है परंतु यदि वह अनिवार्य क्षेत्र में है जहां सिर्फ हाल मार्किंग लगा हुआ आभूषण ही विक्रय होगा तो वह ज्वेलर्स बगैर हाल मार्किंग के आभूषण बेच सकता है यदि उसे हाल मार्किंग लगे हुए आभूषण बेचना है तो उसे रजिस्टर्ड होना होगा चाहे अनिवार्य शेत्र हो या गैर अनिवार्य शेत्र यहां टर्नओवर की बाध्यता नहीं होगी
फिलहाल नोटिफिकेशन तो निकल चुके हैं परंतु अभी तारीख निश्चित नहीं है इसमें अभी समय लगेगा आगामी वर्षों में अनिवार्यता हो सकती है
जी नहीं जीएसटी पोर्टल पर आपको कोई अपलोड नहीं करना है जब आप 15 ग्राम का बिल बना रहे हैं तो ऑलरेडी उस 10 ग्राम का आप जीएसटी पैड कर रहे हैं मतलब कस्टमर से जब आप जीएसटी लेंगे तो आपका तो सिर्फ 5 ग्राम है लेकिन 10 ग्राम कस्टमर का है तो वह जीएसटी में आ जाएगा आपको अपनी बुक्स में एक परचेज अकाउंट बनाना होगा और अधिक जानकारी के लिए अपने सीए से बात कर सकते हैं
आप अनिवार्य जिले में है आपका टर्नओवर 40 लाख से कम है आप एच यू आई डी हाल मार्किंग से संबंधित माल नहीं भेज सकते हैं दूसरी बात यदि आप अपने ग्राहक को किसी होलसेलर से जोकि रजिस्टर्ड है उसक एच यू आई डी का माला करके नहीं बेच सकते हैं क्योंकि आप रजिस्टर्ड नहीं है इसलिए नहीं भेज सकते हैं क्योंकि कस्टमर यदि बिल मांगेगा तो आपको बिल में लिख करके देना होगा जो कि आप रजिस्टर्ड नहीं है इसलिए नहीं लिख सकते 2 ग्राम से कम की ज्वेलरी नहीं या 2 ग्राम से ऊपर यदि आप का टर्नओवर 40 लाख से कम है और आप रजिस्टर्ड नहीं है तो किसी भी प्रकार की कोई जब्ती की कार्रवाई नहीं होगी अनिवार्य क्षेत्र में सारे कानून 40 लाख से ऊपर के टर्नओवर पर और रजिस्टर्ड ज्वेलर्स पर लागू होंगे आपका टर्नओवर 40 लाख से कम है इसलिए कानून की बाध्यता अभी आपके साथ नहीं है लेकिन एक बात का विशेष रूप से ध्यान रखें कि आप अनिवार्य क्षेत्र में अपनी ज्वेलरी का विक्रय करते समय जो दावा कर रहे हैं वह होना चाहिए
जी हां जो नॉन मैंडेटरी डिस्टिक है वहां रजिस्टर्ड ज्वेलर्स के यहां से भी सैंपल लिए जाएंगे यह मिनिमम साल में एक बार और मैक्सिमम 5 बार लिए जा सकते हैं
आप ग्राहक की 10 ग्राम यू आर डी परचेज करेंगे और 15 ग्राम का पूरी राशि का बिल बनाकर उस पर जीएसटी लगाएंगे और 15 ग्राम जो भी आभूषण आपने बनाया है वही हाल मार्किंग के लिए भेजेंगे यही सही प्रोसेस रहेगी
यह व्यवसायिक समस्या है इसे व्यवहारिक रूप से ही हटाया जा सकता है नियम संबंधी कोई समस्या हो तो कृपया बताएं
आपको जीएसटी रजिस्ट्रेशन एवं बीआईएस का रजिस्ट्रेशन दोनों अलग ही लेना होगा क्योंकि नियमानुसार आप अलग हैं आपके पिताजी अलग है मतलब दो व्यक्ति अलग-अलग है इसलिए लाइसेंस भी आपको अलग लेना होगा दूसरी बात यदि आप के पिताजी आपको दुकान ट्रांसफर कर रहे हैं तो यदि पिताजी मौजूद हैं तो आप सर्वप्रथम जीएसटी का रजिस्ट्रेशन ले लीजिए उसके महीने या 2 महीने पश्चात आपके पिताजी आपको दुकान का स्टॉक ट्रांसफर करेंगे जिससे आप क्रेडिट इनपुट ले सकते हैं यदि बगैर जीएसटी रजिस्ट्रेशन के यदि आपको ट्रांसफर करेंगे उसके पश्चात आप रजिस्ट्रेशन लेंगे तो आपके पिताजी को जो 31 मार्च को क्लोजिंग स्टॉक होगा उस पर जीएसटी होगा जिसका आप क्रेडिट नहीं ले पाएंगे इसलिए बेहतर यह है कि पहले आप रजिस्ट्रेशन ले उसके बाद आप अपने पिताजी की फर्म का स्टॉक अपने नाम ट्रांसफर कराएं विधि सम्मत तरीके से जिससे आपको क्रेडिट इनपुट मिल सके विस्तार के लिए आप अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट से विस्तार से समझ सकते हैं प्रोसीजर को
जी हां आप विक्रय कर सकते हैं
जॉब वर्क में ही ऐड होएगा जॉब वर्क का प्रोफार्मा गैलरी में आपको शीघ्र ही देखने को मिलेगा
मेकिंग चार्ज अलग से मेंशन नहीं करना है यह प्राइम कास्ट में ही इंक्लूड होगा यदि आप अलग से लिखेंगे तो जीएसटी का स्लैब बदल जाएगा मेकिंग चार्ज आप अपने अनुसार तय कर सकते हैं जैसे 8 परसेंट 10 परसेंट 12 परसेंट 14 परसेंट जिस हिसाब से आप का जेवर की शुद्धता होगी उस हिसाब से ही आप मेकिंग चार्ज ले सकते हैं
जी हां आप अनिवार्य क्षेत्र में 40 लाख से कम टर्नओवर वाले व्यापारी हैं तो आप बेच सकते हैं परंतु ध्यान रखें यदि आपको हाल मार्किंग से संबंधित कोई भी आभूषण विक्रय करना हो तो वहां पर 40 लाख रुपए की अनिवार्यता नहीं रहेगी वहां आपको कंपलसरी रजिस्टर्ड होना पड़ेगा तभी आप हाल मार्किंग लगे हुए आभूषण विक्रय कर सकते हैं
प्रश्न क्रमांक 1 और 2 का उत्तर है कि उसे 2000000 का टर्नओवर वार्षिक है तो उसे जीएसटी का रजिस्ट्रेशन लेना होगा प्रश्न क्रमांक 3 का उत्तर है उसे 33 ग्राम सोने का वाउचर बनाकर कारीगर को फिर से देना होगा ताकि आवक और जावक बराबर हो सके यदि कारीगर रजिस्टर्ड है तो वह स्वयं अपने रजिस्ट्रेशन पर आपको एच यूआईडी लगा कर देगा क्योंकि वह प्रिंसिपल मैन्युफैक्चरर होगा यदि वह जीएसटी में रजिस्टर्ड कारीगर नहीं है मतलब उसका टर्नओवर 2000000 से कम है तो जो वह माल आपको बनाकर दे रहा है उस आभूषण को आपको स्वयं अपने रजिस्ट्रेशन के माध्यम से हॉल मार्किंग कराना होगा यह फिनिश्ड गुड्स कहलाएगा जब तक कारीगर के यहां है तब तक वह अनफिनिश्ड है उसके पश्चात आपके यहां आ चुका है तो वह फिनिश माना हो जाएगा कुछ आर्टिकल्स जिनमें फर्निशिंग के बाद भी काम रहता है जैसे चैन हुई दाने वगैरह का काम हुआ ऐसे और भी कई क्लासिफाइड ज्वेलरी है जिन्हें अनफिनिश्ड गुड माना जा सकता है
जी नहीं आपको कोई अलग से ना तो रजिस्ट्रेशन लेना है ना लाइसेंस लेना है जो मानक ब्यूरो का रजिस्ट्रेशन है बस वही लेना है और आपके द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह सही है
वैसे तो आपके रजिस्ट्रेशन का कोई भी गलत उपयोग नहीं कर सकता है इसके बावजूद भी यदि कोई आपके रजिस्ट्रेशन पर आपके लिए जारी की गई एच यू आई डी का उपयोग करेगा या गलत उपयोग करेगा तो बी आई एस केयर एप पर सब कुछ दिख जाएगा आने वाले समय में भारतीय मानक ब्यूरो इस व्यवस्था को और उन्नत करने जा रही है जहां इस तरह के फर्जी काम की 0% संभावना होगी फिलहाल ऐसा कोई गलत कार्य नहीं कर सकता है
2 ग्राम से कम वजन की ज्वेलरी वैसे तो नियमानुसार छूट में है आप उसे कोई भी शुद्धता का विक्रय कर सकते हैं परंतु यह जरूर ध्यान रखें कि आप जो भी शुद्धता का दावा कर रहे हैं आपका आभूषण उस शुद्धता के अनुसार होना चाहिए बिल किस प्रकार बनाना है इसका फॉर्मेट गैलरी में दिया जा चुका है आप देख सकते हैं किस तरह से बनाना है
यह स्वैच्छिक है आप चाहे तो मार्किंग करवा सकते हैं जो उसकी शुद्धता है वह भी लिखवा सकते हैं इसके लिए कोई पाबंदी नहीं है
2 ग्राम से कम की ज्वेलरी वैसे भी छूट के अंतर्गत आती है आप अपनी शुद्धता की गारंटी दे कर के भेज सकते हैं बिल में भी लिख सकते हैं
जी हां मान्य है परंतु ध्यान रखिए यदि आप रजिस्टर्ड है तो 1 अप्रैल के बाद आपको सिर्फ एच यू आई डी मार्किंग वाली ज्वेलरी ही बेचना है और यदि आप नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है रजिस्टर्ड नहीं है तो किसी भी प्रकार का बीआईएस से संबंधित चिन्ह का इस्तेमाल नहीं करता
आपका टर्नओवर 40 लाख से कम है लेकिन आपने रजिस्ट्रेशन ले लिया है आपके पास जीएसटी का नंबर नहीं है कोई चिंता नहीं है यदि आपका माल का वजन 2 ग्राम से कम है तो उसे एच यू आईडी नहीं कराना है दूसरी बात आपने जो भी आभूषण अपने दुकान में रखे हैं जो भी आप उसकी शुद्धता की गारंटी देते हैं वह होना चाहिए आप दोनों तरह का आभूषण बेचने के लिए स्वतंत्र हैं आप 1 अप्रैल से आप कोई भी खरीदी करेंगे तो उन आभूषणों पर एच यू आई डी होना चाहिए लेकिन आप सादा माल भी बेच सकते हैं यह अनिवार्यता नहीं यदि आप हाल मार्किंग के आभूषण खरीदेंगे तो एच यू आई डी का ही माल खरीदना होगा किसी भी प्रकार की पुरानी हाल मार्किंग या बगैर सीक्वेंस की किसी भी मार्किंग का माल नहीं खरीदेंगे आप दोनों तरह का माल बेचने के लिए स्वतंत्र है फिलहाल आपको 2 ग्राम से कम कि किसी भी ज्वेलरी को एच यू आई डी करवाने की जरूरत नहीं है लेकिन जो उसकी शुद्धता का आप दावा कर रहे हैं वह होना आवश्यक है
इनवॉइस में अगर आप मेकिंग चार्ज अलग से लिखेंगे तो आपको पांच परसेंट जीएसटी एप्लीकेबल हो जाएगी जिस कैटेगरी का सोना है उसका वजन उस कैटेगरी पर जो भाव बैठता है वह लिखना होगा उसके बाद टोटल वैल्यू जो आप लिखेंगे उसमें आप मेकिंग चार्ज ऐड करके लिखेंगे डिस्क्रिप्शन में लिखेंगे पोलिस चार्ज यह जो भी आप शब्द उचित समझे मेकिंग चार्ज या लेबर शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं टोटल अमाउंट पर ही आप जीएसटी लगाएंगे और साथ में हाल मार्किंग चार्ज भी उसी में जोड़ेंगे फाइनल टोटल करने के बाद
बिल फॉर्मेट एप्लीकेशन की गैलरी में दिया जा चुका है
एप्लीकेशन की गैलरी में देखिए फॉर्मेट डाला जा चुका है
जी हां आप सिर्फ पेंडल पर हाल मार्किंग करा कर के दे सकते हैं और पेंडल का आपको बिल बनाना होगा उस पर आपको हर मार्किंग चार्जेस अंकित करना होंगे यदि आप जीएसटी में रजिस्टर्ड है तो आपको जीएसटी भी उनसे लेना होगा बिल में आप स्पेसिफिक रूप से यह विवरण दे देंगे कि हमने सिर्फ पेंडल बनाया है यह संभव है किसी भी तरह क्लासिफाइड रूप से आप हाल मार्किंग कराने के लिए स्वतंत्र हैं हाल मार्किंग कराने के लिए आपका रजिस्ट्रेशन होना आवश्यक है
जी नहीं अभी ऐसा कोई आदेश नहीं है यदि आप नॉट मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है और आपके आसपास 100 किलोमीटर कोई हॉलमार्क सेंटर है तो यह नियम अभी आपके ऊपर लागू नहीं होगा अभी आप नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में ही रहेंगे लेकिन यदि आपने रजिस्ट्रेशन ले रखा है तो 1 अप्रैल से आपको सिर्फ एच यू आई डी के साथ सारा माल बेचने की भी छूट है यदि आप रजिस्टर्ड नहीं है तो आप किसी भी प्रकार के मानक ब्यूरो के मापदंड के अनुसार किसी भी प्रकार का हाल मार्किंग से संबंधित आभूषण नहीं भेज सकते हैं आप अपना सादा माल बगैर निशान वाला बेचने के लिए स्वतंत्र है और आपके लिए नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट के जो नियम है वह पूर्व की तरह ही लागू है लेकिन जो 100 किलोमीटर वाली आप बात कर रहे हैं वह अभी आपके ऊपर लागू नहीं है आप अभी नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में ही माने जाएंगे
पुराने सोने को आप सर्वप्रथम विधि मान्य तरीके से खरीदी करेंगे खरीदी करने से वह आपके स्टॉक में आ जाएगा उसके पश्चात आप उसे डिस्पैच वाउचर के माध्यम से अपने कारीगर को आभूषण निर्माण हेतु प्रेषित करेंगे जिस केटेगरी का आपको आभूषण बनाना है वह उस वाउचर में मेंशन रहेगा कारीगर के द्वारा जब आभूषण बनाया जाएगा तो कारीगर वाउचर के माध्यम से इतना वजन आपको रिटर्न करेगा वही में आप कारीगर को वेस्टेज या जॉब वर्क का बिल बना कर पैसा देंगे उसके पश्चात उसे हाल मार्क सेंटर पर हाल मार्किंग हेतु भेजेंगे यह हो गई प्रथम प्रक्रिया इसके पश्चात यदि कोई अच्छी कंडीशन का पुराना माल यदि आपके पास बिकने के लिए आता है और उस पर पुराना हाल मार्क लगा हुआ है आपको उसे पुनः विधि माने तरीके से खरीदी करके सीधे हॉलमार्क सेंटर को अपने रजिस्ट्रेशन पर हाल मार्किंग हेतु भेज देना है इस तरह से आप अपने पुराने खरीदे गए सोने को विधि मान्य तरीके से व्यवस्थित कर सकते हैं
आपके कारीगर की रकम पर एच यू आई डी आपके प्रश्न से तीन उत्तर निकलकर आते हैं यदि आप स्वयं माल बनवाते हैं कारीगर के माध्यम से तो आपके रजिस्ट्रेशन पर उसमें एच क्यू आईडी होगा यदि आप स्वयं कारीगर है और माल का विक्रय भी करते हैं तो आपको स्वयं रजिस्ट्रेशन लेना होगा उसके पश्चात ही आप एच यू आई डी लगवा सकते हैं तीसरी बात यदि आप कारीगर हैं स्वयं का माल भी बनाते हैं माल बनाकर बेचते भी हैं ऐसी स्थिति में भी आपको रजिस्ट्रेशन लेना होगा क्योंकि जो व्यापारी आपसे आभूषण का निर्माण करवाएगा हो सकता है वह आपसे एच यू आई डी की मांग करें ऐसी तीनों स्थिति में आपको रजिस्ट्रेशन लेकर के ही एच यू आई डी करवाने हेतु आप अधिकृत हो सकते हैं
यदि कोई व्यक्ति सोना या चांदी गिरवी रखकर आपसे पैसे की मांग करता है तो आप नगद में सिर्फ ₹20000 के अंदर तक उसे रुपया दे सकते हैं और जब वह रकम छुड़ाने आएगा तब भी आप उसे ₹20000 तक ही नगदी प्राप्त कर सकते हैं इससे ऊपर जो भी राशि का भुगतान किया जाएगा वह बैंक के माध्यम से ही होगा आयकर आयकर कानून-1961 की धारा-269SS के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को अपने खाते में अन्य व्यक्ति से कुल 20,000 रुपए से ज्यादा नकद जमा या लोन के रूप में लेना मना है. इसके लिए केवल इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर किया जाना चाहिए. वहीं कानून की धारा 271D के मुताबिक, सेक्शन 269SS का उल्लंघन करना दंडनीय अपराध है.
जी हां सभी के लिए 1 अप्रैल 2023 से नई व्यवस्था के अंतर्गत सभी को एच यू आई डी का माल बेचना है जो क्षेत्र अनिवार्य हो चुके हैं यह नियम विशेष रूप से वहां ज्यादा प्रभावशाली होगा जो छेत्र अनिवार्य नहीं है वहां बीआईएस के अंतर्गत जो व्यापारी रजिस्टर्ड है उन्हें सिर्फ 1 अप्रैल 2023 से HUID का ही माल विक्रय करना है साथ में वह अपना बगैर हाल मार्किंग का माल भी विक्रय कर सकते हैं जो क्षेत्र अनिवार्य नहीं है उन क्षेत्रों में बगैर रजिस्ट्रेशन के कोई भी व्यापारी भारतीय मानक ब्यूरो के मापदंड का उपयोग नहीं कर सकता है जैसे मानक ब्यूरो के चिन्ह का इस्तेमाल जेवरात पर लगने वाली मानक ब्यूरो की मोहर आदि का इस्तेमाल नहीं कर सकता है परंतु यदि गैर अनिवार्य क्षेत्र में यदि व्यापारी रजिस्ट्रेशन ले लेता है तो वह दोनों तरह का माल बेचने हेतु स्वतंत्र रहेगा परंतु 1 अप्रैल 2023 से जो भी माल अनिवार्य क्षेत्र हो या गैर अनिवार्य क्षेत्र हो सभी एच यू आई डी का ही आभूषण विक्रय करना है जो रजिस्टर्ड व्यापारी है वह सभी 31 मार्च तक अपने पुराने जेवरात एच यू आई डी में परिवर्तित करा सकते हैं
फिलहाल अभी ऐसा कोई नियम नहीं है कि कोई अधिकारी सीधे कारीगर के पास जाएं यदि कारीगर भारतीय मानक ब्यूरो रजिस्टर्ड उसी स्थिति में अधिकारी कारीगर के पास जांच हेतु जा सकता है और उसके पास जो भी सोना या जेवरात होंगे उनकी जांच कर सकता है इसके पूर्व नहीं
कर्ज और भुगतान नकद लेन-देन के रूप में कर्ज लेने पर भी नियम बनाए गए हैं. कर्ज की स्थिति में मात्र 20000 रुपये तक नकद में लेन-देन कर सकते हैं. इससे अधिक के कर्ज के लिए बैंक का माध्यम ही चुनना होगा. इसी तरह कर्ज को वापस करने में भी समान नियम लागू होते हैं.
यदि आप अनिवार्य क्षेत्र में आते हैं तो आप तो पुरानी ज्वेलरी को निश्चित रूप से एच यू आई डी में 31 मार्च तक परिवर्तित कराना अनिवार्य रहेगा 2 ग्राम से कम वजन की ज्वेलरी के लिए अधिनियम के अनुसार छूट दी गई है यह बात अलग है आप अपने दुकान की विश्वसनीयता एवं शुद्धता को ग्राहकों के मध्य स्थापित करने हेतु लगवा सकते हैं परंतु अनिवार्यता नहीं है दूसरी बात यदि कोई ग्राहक पुरानी ज्वेलरी अच्छी स्थिति में आपके पास बेचने आता है और यदि वह ओल्ड हॉल मार्किंग के द्वारा चिन्हित की गई है तो आप उसे वैधानिक तरीके से खरीदी करके उस पर नई एच यू आई डी करवा सकते हैं पुरानी ज्वेलरी के संबंध में दूसरी बात यह है कि यदि आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में है तो आपके पास यदि ओल्ड स्टॉक पुरानी हाल मार्किंग का है तो आप उसे नए नियम के अनुसार 1 अप्रैल 2023 से पूर्व एच यू आई डी में परिवर्तित कराना होगा
जो क्षेत्र अनिवार्य नहीं है वहां पर जो रजिस्टर्ड व्यापारी हैं जिन्होंने बीआईएस मैं अपना रजिस्ट्रेशन कराया है उन व्यापारियों के यहां 1 अप्रैल 2023 से सिर्फHUID का ही माल विक्रय किया जा सकेगा वह रजिस्ट्रेशन लेने के साथ-साथ दोनों तरह के आभूषण विक्रय कर सकता है परंतु जो व्यापारी गैर अनिवार्य क्षेत्र में रजिस्टर्ड नहीं है वह किसी भी प्रकार का हाल मार्किंग का माल विक्रय नहीं कर सकता है वह अपना बगैर मार्किंग वाला माल बेचने के लिए ही अधिकृत रहेगा उसके पास किसी भी प्रकार का मानक ब्यूरो से संबंधित निशान मानक ब्यूरो द्वारा अधिकृत चिन्ह लगा हुआ आभूषण नहीं होना चाहिए
अभी आपका जिला अनिवार्य क्षेत्र में नहीं है इसलिए आप रजिस्ट्रेशन के उपरांत दोनों तरह के आभूषण विक्रय करने के लिए अधिकृत होंगे लेकिन यहां ध्यान रखने वाली बात यह है की 1 अप्रैल 2023 के पश्चात 6 मार्च को जारी किए गए नोटिफिकेशन के आधार पर अब सिर्फ एच यू आई डी वाले आभूषण का विक्रय 1 अप्रैल से मान्य होगा फिलहाल इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं है कि जारी नोटिफिकेशन के आधार पर अभी यही निष्कर्ष निकला है कि यह सभी जगह लागू है
आयकर अधिनियम के अंतर्गत आप नगद सोना नियमानुसार सीमा के अंतर्गत खरीद कर कारीगर से यदि ज्वेलरी बनाते हैं तो आप उसके ऊपर बेशक एच यू आई डी लगवा सकते हैं जो एक वैधानिक प्रक्रिया है इस प्रक्रिया के अंतर्गत आप कारीगर को इशु वाउचर के माध्यम से सोना देंगे और कारीगर के द्वारा दिए गए डिस्पैच वाउचर से उस आभूषण को वापस लेंगे तथा जॉब वर्क का बिल बनाकर उसे देंगे यहां पर इस बात की तस्दीक करना होगी कि क्या कारीगर का वार्षिक जॉब वर्क का टर्नओवर यदि 20 लाख से ऊपर है तो वह जीएसटी के दायरे में भी होगा उसके पास जीएसटी का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य है उस आधार पर वह आपको जीएसटी का जॉब वर्क का बिल देगा यदि उसका जॉब वर्क 2000000 वार्षिक से काम है तो आप उसे जॉब वर्क का भुगतान कर सकते हैं और जिसका लेखा आपको अपनी वही में करना होगा उसके बाद आप अपने आभूषण को हाल मार्किंग के लिए सेंटर भेज सकते हैं यहां पर प्रिंसिपल मैन्युफैक्चरर आप होंगे और नियमानुसार शुद्धता की जवाबदारी आपकी ही होगी
बड़वानी जिले में हाल मार्क की अनिवार्यता जब तक की कोई हाल मार्क सेंटर नहीं खुलता तब तक अनिवार्य नहीं होगा या सीमावर्ती क्षेत्र जो 100 किलोमीटर के अंदर आता हो और वहां पर हॉलमार्क सेंटर हो तो वह कलेक्शन सेंटर खोल खोलता है तो भी अनिवार्य हो सकता है परंतु अभी इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं है
आपके जिले में हॉलमार्क सेंटर नहीं है आपका प्रश्न पूर्ण करें क्या जानना चाहते हैं
पुराना माल बगैर हाल मार्किंग का है यदि आप अनिवार्य जिले के अंतर्गत नहीं है तो आप बेफिक्र होकर व्यापार कर सकते हैं यदि आप रजिस्टर्ड व्यापारी बीआईएस में तो आप चाहे तो उस माल को एच यू आई डी करवा सकते हैं और चाहे तो नहीं भी करवा सकते हैं आपको यह देखना है कि क्या आप मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है या नॉन मैंडेटरी डिस्टिक में दूसरी बात यदि मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है तो आपका टर्नओवर यदि 40 लाख से ऊपर है और आपने रजिस्ट्रेशन नहीं लिया है तो तत्काल आपको रजिस्ट्रेशन लेना होगा और यदि आप नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में है यदि आप हॉल मार्किंग का माल बेचना चाहते हैं तो आपको रजिस्ट्रेशन लेकर के ही माल बेचना होगा यहां पर 4000000 की अनिवार्यता नहीं है 0 टर्नओवर वाले को भी रजिस्ट्रेशन लेना होगा परंतु नॉन मैंडेटरी डिस्ट्रिक्ट में रजिस्ट्रेशन लेकर के ही आप हाल मार्किंग के आभूषण बेच सकते हैं
आप किस परिपेक्ष में पूछ रहे हैं पूर्ण रूप से स्पष्ट प्रश्न बताएं
यह विभागीय समीक्षा है इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है वैसे पैन कार्ड आधार कार्ड सभी लिंक हो चुके हैं
वर्तमान परिपेक्ष के वातावरण को देखते हुए संभवत इस तरह के आदेश दिए जा सकते हैं परंतु वर्तमान में इस तरह का अभी कोई प्रावधान नहीं है
अभी इस संबंध में कोई दिशा निर्देश सरकार की ओर से जारी नहीं किए गए हैं
फिलहाल इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं है तत्कालिक 3 मार्च के जारी सूचना के आधार पर 1 अप्रैल से अनिवार्यता लागू हो जाएगी
यहां पर तीन बातें हैं पहली यदि कारीगर बी आई एस का रजिस्टर्ड लाइसेंसी है तो दूसरी बात क्या वह जॉब वर्क में 20 लाख से ऊपर है और तीसरी बात क्या वह इनकम टैक्स देता है इन परिस्थितियों में यदि कोई अधिकारी आएगा और बगैर वाउचर के उसके पास सोना है पूछने पर यदि वह संतुष्टि पूर्वक स्पष्टीकरण नहीं दे पाता है तो वह माल जप्त होगा अन्यथा स्वतंत्र कारीगर के पास अधिकारी के जाने का कोई कारण नहीं बनता
आपका बिल जितने वजन का बनेगा उसकी कीमत पर 1% आपको कंपोजीशन के आधार पर जीएसटी देना पड़ेगा
यदि कोई दुकानदार बगैर वाउचर के कारीगर माल बनाने को देता है तो उसे अपने खुद के रजिस्ट्रेशन पर एच यू आई डी कराने पर कोई प्रॉब्लम नहीं होगी परंतु इस बात की तस्दीक जरूर करना होगी कि उन्होंने आभूषण कहां पर बनवाया है यदि बाहर से बना है तो जॉब वर्क की एंट्री वही में होना चाहिए और यदि बाहर से नहीं बनवाया है स्वयं के पास सैलरी बेस कारीगर से बनवाया है तो कोई भी एंट्री की जरूरत नहीं है बस आपके पास जो आभूषण बनाया है उसकी व्यवस्थित एंट्री होना चाहिए
क्या आप अनिवार्य क्षेत्र के हैं यदि अनिवार्य क्षेत्र के हैं और आपका वार्षिक टर्नओवर 40 लाख से कम है या अधिक है तो भी आप पुरानी हाल मार्किंग की ज्वेलरी 1 अप्रैल के बाद से विक्रय नहीं कर सकते यदि आप गैर अनिवार्य क्षेत्र में रजिस्टर्ड व्यापारी हैं तो आपको पुरानी हाल मार्किंग को नए एच यू आई डी में परिवर्तित करना होगा फिलहाल अभी इस संबंध में यही अपडेट है क्षेत्र में
नियमानुसार तो जड़ाऊ और कुंदन ज्वेलरी अभी मैंडेटरी नहीं हुई है और 2 ग्राम से अंदर की ज्वेलरी भी अनिवार्यता से बाहर है यदि आप अपनी विश्वसनीयता और अपने दुकान की साख के लिए यदि लगवाना चाहते हैं और बायर टू बायर व्यापारी के मन में विश्वसनीयता कायम करना चाहते हैं तो आप यह करवाने के लिए स्वतंत्र हैं बाकी नियमानुसार यह मैंडेटरी नहीं है
वह सिंगल पीस आर्टिकल पर हॉल मार्किंग करने से मना नहीं कर सकते हैं यदि वह मना कर रहे हैं तो राज्य के भारतीय मानक ब्यूरो ऑफिस में आप उस हॉलमार्क सेंटर की तुरंत शिकायत कर सकतेto 4 article तक minimum charges २००/- लगेंगे और आपके article से २५० mg scrapping करके Fire assay किया जायेगा हैं
जी हां आप बगैर जीएसटी के भी व्यापार कर सकते हैं लेकिन यदि आप का टर्नओवर 4000000 से ऊपर जाएगा तो आप को रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य होगा
आप व्यापार कर सकते हैं जब तक आप का टर्नओवर 4000000 तक नहीं होता तब तक आप जीएसटी में रजिस्टर्ड होने से बच सकते हैं यदि आप कंपोजीशन में जाएं तो भी आप रजिस्ट्रेशन ले सकते हैं लेकिन यदि आपके पास जीएसटी नहीं है तो ऐसा नहीं है कि आप व्यापार नहीं कर सकते आप व्यापार कर सकते हैं आपका यह संवैधानिक अधिकार है